खचाखच भीड़ से भरी ट्रैन जब कोटा रेलवे स्टेशन पर रुकी तो कहीं से एक 10 साल लड़का भीड़ को चीरते हुए अंदर आया ।
उसने देखा की सामने वाली बर्थ पर सिर्फ 4 लोग बैठे हुए है और वो भी पैर पसार कर । उसने आते ही उन लोगों से कहना शुरू कर दिया की वो ढंग से बैठे क्योंकि वहाँ अभी एक आदमी और बैठ सकता था ।
लेकिन उसकी बातों का उन लोगों पर कोई असर नहीं पड़ा । फिर वो लड़का बदतमीज़ी करने लगा और लड़ते झगड़ते हुए उसने अपनी जगह बना ली ।
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सब लोग उसे भला बुरा कहने लगे ।
एक अंकल तो उस पर हाथ उठाने तक को हो गए । लोगो ने उनको रोका ।
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सब लोग उसे भला बुरा कहने लगे ।
एक अंकल तो उस पर हाथ उठाने तक को हो गए । लोगो ने उनको रोका ।
फिर उसने अपनी शर्ट उतारी और अपनी जगह पर रख कर ट्रैन के बाहर चला गया । सब लोग उसके बारे में बुरी बुरी बातें करने लगे कि आवारा बच्चे ऐसे ही होते है, जिनके माँ बाप पैदा होते ही शहर में छोड़ जाते है और ना जाने क्या क्या ।
कुछ 2 मिनट के बाद वो लड़का एक बूढ़ी अम्मा का हाथ थामे हुए अंदर आया । उसने अपनी शर्ट उठाई और अम्मा जी को अपनी जगह बैठा दिया और बोला कि माँ ये जगह मैंने बहुत लड़ झगड़ कर बनाई है ।
सारे पढ़े लिखे लोग एक दूसरे का मुँह ताकने लगे ।